20 नेपाली गजल - Nepali Ghazal
  • योपल्ट पनि चोट लाईदिनू के भो त!

लेखकःराजन कार्की 796 पटक पढिएको:

 

योपल्ट पनि चोट लाईदिनू के भो त!

तर पैले औषधि बताईदिनू के भो त!

(इ बेरो चोट लगादिअ कि भेले त

पन पले दवा सूझादिअ कि भेले त)

 

सपनामा चैं खुब बोलुन् मान्छेहरू

विपनामा सातो उडाईदिनू के भो त!

(बोलेदिअ जे सब बोलैछे सपना में

विपना में बौका बनादिह कि भेले त)

 

विषले विष काट्छ भन्छन् भन्नेहरू

दुई दुई पटक पिलाईदिनू के भो त!

(सुननेछिअ जहरके जहरे काटैछे

दु दु बेर पिलादिह कि भेले त)

 

बढ्नै नदिनू, छोट्याईदिनू टुप्पाहरू

आफ्नोचैं जरा धसाईदिनू के भो त!

(बढेला कैकरो नैदिअ, काटदिअ

आपन जड धसादिह कि भेले त)

 

शयशय वटा, कलीयुगकै गर्नु काम

कुराचैं सतयुगको सुनाईदिनू के भो त!

(सौ सौटा कल्जुग के करू काम

बात सत्जुगके सुनादिह कि भेले त)

 

गधालाई मान्छे बनाउनु भोट तान्न

नोट तान्न उल्टो बनाईदिनू के भो त!

(गधौके आदमी बनाके भोट लिह

नोट लिह त उल्टा क्यादिह कि भेले त)

 

हामी चिहान भए नलिनू पिर कुनै

खनेर काम चलाईदिनू के भो त!

(कोनो चिन्ता नै करु हमरा चिहानके

खोदके काम चलालिह कि भेले त)

राजन कार्की